Thursday, 6 November 2014

एशियाई इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बैंक के लिए भारत सहित 20 देशों ने हस्ताक्षर किए

एशियाई इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बैंक के लिए भारत सहित 20 देशों ने हस्ताक्षर किए

वित्तीय जगत में अमेरिकी और यूरोपियन प्रभुत्‍व को चुनौती देते हुए एशियन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर इंवेस्‍टमेंट बैंक (ए.आई.आई.बी.) की स्‍थापना की गई है. चीन और भारत ने इस बैंक में बड़ा योगदान किया है, लेकिन ऑस्‍ट्रेलिया, इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया ने इससे दूरी बनाए रखी. इस बैंक को चीन सहित 20 एशियन देशों का समर्थन प्राप्‍त है. इसके साथ ही चीन ने बैंक के 100 अरब डॉलर के कोष में लगभग 50 अरब डॉलर की राशि का योगदान दिया है. चीन के बाद भारत इस बैंक में 13 से 20 अरब डॉलर की हिस्‍सेदारी रखेगा. इस बैंक की मदद से एशियाई देश अपनी बुनियादी सुविधा (इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर) योजनाओं के लिए धन प्राप्‍त कर पांएगे.

एशियन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर इंवेस्‍टमेंट बैंक स्थापित करने की पहल को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है क्योंकि अधिकांश एशियाई देशों की बुनियादी सुविधाओं के निर्माण में पूंजी-निवेश का अभाव है। भविष्य में यह बैंक इस क्षेत्र में वर्तमान में चल रही बहुपक्षीय बैंकिंग प्रणाली की खामियों को दूर करेगा और इस क्षेत्र के आर्थिक विकास, जन-जीवन के सुधार और गरीबी उन्मूलन में सकारात्मक भूमिका अदा करेगा।

चीन के उप वित्त मंत्री जिन लिक्यून को ए.आई.आई.बी. का महासचिव नियुक्त किया गया है। जिन एशियाई विकास बैंक के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इस बैंक का मुख्यालय चीन में होगा और इसके अगले साल कामकाज शुरू करने की आशा है।

चीन और भारत के अलावा ए.आई.आई.बी. के अन्य सदस्यों में वियतनाम, उज्बेकिस्तान, थाइलैंड, श्रीलंका, सिंगापुर, कतर, ओमान, फिलीपीन, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, ब्रुनेई, कम्बोडिया, कजाकिस्तान, कुवैत, लाओस, मलेशिया, मंगोलिया व म्यांमार शामिल हैं।

अमेरिकी दबाव के चलते में ऑस्‍ट्रेलिया, इइंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने बैंक की सदस्यता लेने से इंकार कर दिया. दरअसल इस बैंक के शुरू होने से विश्व बैंक पर एशियाई देशों की निर्भरता कम होगी. एशियाई देश अपनी योजनाओं के लिए इस बैंक से सहायता लेना शुरू करेंगे तो वैश्विक वित्तीय बाजार में अमेरिका और यूरोपीय देशों का वर्चस्‍व कम होगा. इस बैंक के खुलने से एशियाई अर्थव्यवस्था में भारत और चीन का प्रभाव और बढ़ेगा. ए.आई.आई.बी. में भागीदारी के फैसले पर भारत का विचार है कि नया बैंक बुनियादी ढांचा वित्त पोषण के लिए संसाधन पूंजी आधार उपलब्ध कराएगा, जो क्षेत्रीय विकास के लिए अच्छी बात है।

सदस्यों के वोट के अधिकार की कसौटी तय करने के लिए विचार-विमर्श होगा और यह सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) व क्रयशक्ति समानता (पी.पी.पी.) के आधार पर तय होगा। इस फार्मूले के आधार पर चीन के बाद भारत बैंक का दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक होगा

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